नमस्ते दोस्तों, मैं हूँ आपका सुशांत। आज बात करते हैं सूर्या की नई तमिल फिल्म करुप्पू की। मैं पहले दिन दूसरे शो में थिएटर गया था। सुबह 9 बजे का शो, पूरा हॉल तमिल भाई-बहनों से भरा हुआ था। इंटरवल तक तो दिल में लगा कि फिल्म कुछ खास बन रही है, लेकिन अंत में क्रेडिट्स आने तक मन थोड़ा मिला-जुला सा हो गया। आइए बिल्कुल दिल से, बिना किसी लाग-लपेट के पूरी बात करते हैं।
करुप्पू -पहला इम्प्रेशन
फिल्म खत्म होते ही मेरा रिएक्शन था – “अरे यार, पहला हाफ तो कमाल का था, दूसरा हाफ ने क्यों बिगाड़ दिया?” थिएटर में सूर्या के एंट्री पर सीटियाँ बज रही थीं, तालियाँ गूंज रही थीं। लेकिन फिल्म खत्म होने के बाद बाहर निकलते वक्त लोगों के चेहरों पर वो “वाह” वाली खुशी नहीं थी। जैसे कुछ अधूरा रह गया हो। मैं भी यही महसूस कर रहा था। भगवान को हीरो बनाने का आइडिया नया था, लेकिन उसे मसाला फिल्म के भारी डोज में इतना डुबो दिया कि असली इमोशन कहीं खो गया।
करुप्पू : सिनेमैटिक क्राफ्ट और परफॉर्मेंस
एक्टिंग और परफॉर्मेंस :
सूर्या इस फिल्म में पूरा जोर लगा रहे हैं। उनका स्क्रीन प्रेजेंस इतना मजबूत है कि जब वे कोर्टरूम में आते हैं, पूरा हॉल सन्नाटे में चला जाता है। करुप्पू के रोल में वे दो-तीन अलग-अलग रूपों में दिखते हैं – कभी शांत, कभी आक्रामक मास हीरो। क्लाइमेक्स वाला लुक तो बिल्कुल कांतारा और पुष्पा जैसा लगता है। लेकिन दिल से कहूँ तो ऋषभ शेट्टी वाला “भगवान मोड” एक्टिंग यहां मिस हो गया। सूर्या ने कोशिश बहुत की, पर वो अंदर वाली दिव्यता महसूस नहीं हुई जितनी उम्मीद थी।
आरजे बालाजी बेबी कन्नन के रोल में बहुत चालाक और धूर्त लगते हैं। उनकी डायलॉग डिलीवरी तगड़ी है। तृषा कृष्णन को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला, लेकिन जहां आईं, ठोस काम किया। इंद्रांस और अनाघा माया रवि पिता-पुत्री की बेबसी को बहुत अच्छे से निभाते हैं – पहला हाफ देखते वक्त गुस्सा और दुख दोनों एक साथ उबलते थे। नट्टी सुब्रमण्यम जज के रोल में बिल्कुल सहज थे। कुल मिलाकर कास्टिंग ठीक है, लेकिन सूर्या के अलावा कोई भी किरदार दूसरे हाफ में ठीक से विकसित नहीं होता।
इसे भी पढ़ें : Kartavya Netflix Honest Review
सिनेमैटोग्राफी और साउंड डिजाइन
जीके विष्णु की कैमरा वर्क में रंग काफी ज्यादा संतृप्त दिखते हैं। एलिवेशन शॉट्स और स्लो मोशन वाले मास सीन में लाइटिंग ड्रामेटिक है, लेकिन कभी-कभी आंखों में चुभ जाती है। कोर्टरूम के सीन टाइट और रियलिस्टिक हैं – वहां कैमरा इमोशंस को अच्छे से पकड़ लेता है।
साई अभ्यंकर का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म की जान है। पहले हाफ में इमोशनल क्षणों में परफेक्ट है और मास मोमेंट्स में एनर्जी भर देता है। टाइटल ट्रैक और कुछ गाने दर्शकों को खड़ा कर देते हैं। लेकिन दूसरे हाफ में स्कोर भी फैन सर्विस जैसा लगता है – हर पंच डायलॉग के पीछे जबरन एलिवेशन म्यूजिक।

करुप्पू -कहानी की असली हकीकत
करुप्पू ऐसी कहानी है जिसमें एक बेबस पिता-पुत्री (इंद्रांस और अनाघा) के जेवर चोरी के केस में सिस्टम इतना भ्रष्ट हो जाता है कि भगवान को खुद आकर मदद करनी पड़ती है। शर्त ये है कि वेट्टई करुप्पू (सूर्या) अपनी दिव्य शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। उन्हें इंसान बनकर केस जीतना है।
पहला हाफ कोर्टरूम ड्रामा पर बहुत मजबूत है। बेबी कन्नन (आरजे बालाजी) सिस्टम को हैक करके बैठा है, एकमात्र सच्चा वकील (तृषा) लगातार हार रही है। लोगों की बेबसी, न्याय में देरी – ये सब सच्चा लगता है। सूर्या की एंट्री और उनका चैलेंज स्वीकार करना – यहां तक फिल्म बहुत टाइट और रोचक है।
लेकिन इंटरवल के बाद पूरी फिल्म बदल जाती है। पिता-पुत्री का इमोशनल सफर लगभग छोड़ दिया जाता है। एक अहम किरदार की मौत के बाद भी फिल्म उन पर फोकस नहीं करती। उसके बजाय नया केस (सेक्सुअल असॉल्ट वाली लड़की – शिवदा) आता है और यहां से पूरा “भगवान मोड” शुरू हो जाता है – लायर लायर स्टाइल कॉमेडी, पंच डायलॉग, लियो-सिंघम-जय भीम जैसे रेफरेंस एक के बाद एक।
एंडिंग एक्सप्लेन्ड – क्लाइमेक्स ब्रेकडाउन
क्लाइमेक्स में सूर्या पूरे मास हीरो अवतार में आ जाते हैं। Honest Cinematic Movie Review and Explanations में सबसे बड़ी बात ये है कि फिल्म खुद को ये साबित करना चाहती है कि “भगवान भी अगर नियमों का पालन करें तो इंसान को जीत दिलवा सकते हैं।” लेकिन एक्जीक्यूशन में ये इमोशनल नहीं, सिर्फ तमाशा बन जाता है।
“बस भगवान वाली बातें” वाली अस्पष्ट लॉजिक से सब कुछ समझा दिया जाता है। पिता-पुत्री को अंत में सिर्फ एक झलक में दिखाया जाता है। क्लाइमेक्स का फाइनल मुकाबला और फैसला देखते वक्त थिएटर में सीटियाँ तो बज रही थीं, लेकिन दिल को गहराई नहीं मिल रही थी। जैसे डायरेक्टर आरजे बालाजी को फैन सर्विस इतना पसंद आ गया कि असली कहानी भूल ही गए। एंडिंग पहले से पता चलने वाली है, लेकिन सूर्या का स्वैग उसे थोड़ा मनोरंजक बना देता है।
मेरा फाइनल वर्डिक्ट और रेटिंग
करुप्पू ऐसी फिल्म है जो पहला हाफ बहुत वादा करती है और दूसरा हाफ खुद को बिगाड़ लेती है। अगर आप सूर्या के दीवाने फैन हैं तो थिएटर में जाकर मजा ले आइए – उनके मास मोमेंट्स, सीटियाँ और इंटरवल तक का कोर्टरूम ड्रामा काबिल-ए-तारीफ है। लेकिन अगर आपको कहानी, इमोशन और लगातारता चाहिए तो ओटीटी पर इंतजार कर सकते हैं।
मेरा रेटिंग: 6.2/10
- पहला हाफ: 8/10
- दूसरा हाफ: 4.5/10
- सूर्या की परफॉर्मेंस: 7.5/10
- कुल मनोरंजन: 6.5/10
किसको देखनी चाहिए?
- सूर्या के पक्के फैंस को
- हल्की-फुल्की मसाला फिल्म पसंद करने वालों को
- कोर्टरूम ड्रामा + दिव्य ट्विस्ट ट्राई करने वालों को
किसको स्किप करनी चाहिए?
- जो गहरी इमोशनल कहानी और लगातार लेखन चाहते हैं
- जिन्हें फैन सर्विस और बिना मतलब के रेफरेंस से चिढ़ होती है
दोस्तों, सिनेमा में प्रयोग होना चाहिए, लेकिन प्रयोग को पूरी तरह निभाना भी जरूरी है। करुप्पू ने शुरुआत बहुत शानदार की थी, लेकिन अंत में सिर्फ मास हीरो का पैकेज बनकर रह गई। आपने ये फिल्म देखी है? अपना अनुभव कमेंट में जरूर बताइए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. करुप्पू रिलीज हुई है या नहीं?
हां भाई, करुप्पू रिलीज हो चुकी है। 15 मई 2026 को वर्ल्डवाइड थिएटर्स में आई थी। अभी 6 दिन हो चुके हैं रिलीज को। मैंने खुद दूसरे दिन सुबह का शो देखा था। पहले दिन थोड़ी गड़बड़ हुई थी शो टाइमिंग की, लेकिन 15 तारीख से फुल फॉर्म में चल रही है। अभी थिएटर में अच्छी-खासी भीड़ है, खासकर सूर्या के फैंस की।
2. करुप्पू कोल्लू किसके लिए प्रयोग किया जाता है?
करुप्पू कोल्लू यानी काला घोड़ा चना (Black Horse Gram)। ये दक्षिण भारत (खासकर तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र) में बहुत इस्तेमाल होता है।
मेरी माँ इसे सर्दियों में अक्सर बनाती थीं – कोल्लू रसम, कोल्लू परुप्पु, स्प्राउट्स वगैरह। ये प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम से भरपूर होता है। वजन घटाने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने, जोड़ों के दर्द और महिलाओं की हड्डियों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
मैं खुद सुबह नाश्ते में कोल्लू स्प्राउट्स खाता हूँ, थोड़ा सा नमक-नींबू डालकर – बहुत हल्का और तगड़ा लगता है।
3. करुप्पू क्या है?
करुप्पू दो चीजों को कहते हैं:
- फिल्म वाला करुप्पू: सूर्या वाली नई फिल्म, जिसमें सूर्या भगवान वेट्टई करुप्पू (एक ग्रामीण देवता) का रोल निभा रहे हैं।
- असली करुप्पू: तमिलनाडु के गांवों में पूजे जाने वाले बहुत शक्तिशाली रक्षक देवता – करुप्पुसामी या कावल करुप्पू। ये न्याय, सुरक्षा और बदला लेने वाले देवता माने जाते हैं। काला रंग, त्रिशूल और घोड़े पर सवार – बहुत उग्र रूप वाला देवता है।
जैसे उत्तर भारत में खंडोबा या बाबा बालक नाथ, वैसे ही दक्षिण में करुप्पुसामी। फिल्म भी इन्हीं पर बेस्ड है।
4. करुप्पू फिल्म की हीरोइन कौन है?
ट्रिशा कृष्णन (Trisha Krishnan)।
वे प्रीथी नाम की एक ईमानदार वकील का रोल प्ले कर रही हैं। फिल्म में सूर्या के साथ उनकी केमिस्ट्री अच्छी है, लेकिन रोल ज्यादा लंबा नहीं है। ट्रिशा ने जैसे हमेशा की तरह क्लास और इमोशन दोनों अच्छे से दिया है।
अगर आप ट्रिशा की फैन हो तो फिल्म में उनके सारे सीन एंजॉय करेंगे।
सूर्या और ट्रिशा की अन्य फिल्में
दोस्तों, करुप्पू में सूर्या और ट्रिशा की जोड़ी देखकर मुझे पुरानी यादें ताजा हो गईं। ये दोनों साथ में पहले भी काम कर चुके हैं और उनकी केमिस्ट्री हमेशा से ही अच्छी रही है। आइए सरल भाषा में जानते हैं उनकी मुख्य फिल्में:
सूर्या और ट्रिशा की साथ वाली फिल्में
- मौनम पेसियाधे (2002) → ये उनकी पहली फिल्म साथ में थी। ट्रिशा की लीड रोल में डेब्यू फिल्म। रोमांटिक ड्रामा, बहुत ही इमोशनल और यादगार। आज भी इसके गाने सुनकर अच्छा लगता है।
- आरु (2005) → एक्शन वाली फिल्म। सूर्या का मास अवतार और ट्रिशा का रोल।
- आयुधा एழुथु (2004) → मणिरत्नम की फिल्म (हिंदी में युवा)। इसमें दोनों ensemble cast में थे, साथ में माधवन और सिद्धार्थ भी थे। राजनीतिक ड्रामा।
- करुप्पू (2026) → अभी वाली, 20+ साल बाद reunion।
सूर्या की अन्य बेहतरीन फिल्में (मेरी पसंदीदा)
सूर्या को मैं “मास + एक्टिंग” का पूरा पैकेज मानता हूँ। मेरी टॉप पसंद:
- सूररै पोट्टू (2020) – नेशनल अवॉर्ड वाली। उड़ान भरने का सपना देखने वाले आदमी की कहानी। दिल छू जाती है।
- जय भीम (2021) – बहुत पावरफुल। दलित अधिकारों पर बनी, सूर्या का परफॉर्मेंस कमाल का।
- घजिनी (2005) – याददाश्त खोने वाले बिजनेसमैन का रोल। रीमेक हुई थी।
- काखा काखा (2003) – पुलिस ऑफिसर का रोल, पहली बड़ी हिट।
- वांरनम आयिरम (2008) – डबल रोल, इमोशनल और एक्शन दोनों।
- 24 (2016) – टाइम ट्रैवल वाली, साइंस फिक्शन में सूर्या जबरदस्त।
- सिंगम सीरीज – मास वाला सूर्या जो सबसे ज्यादा पसंद आता है फैंस को।
- विक्रम (2022) – कमल हासन के साथ, धांसू एंट्री।
ट्रिशा कृष्णन की अन्य बेहतरीन फिल्में
ट्रिशा को मैं “क्लास + इमोशन” वाली एक्ट्रेस मानता हूँ। उनकी कुछ यादगार फिल्में:
- 96 (2018) – ट्रिशा और विजय सेथुपति की। रोमांटिक, नॉस्टैल्जिया से भरी। ट्रिशा का बेस्ट परफॉर्मेंस।
- विन्नैथांडी वरुवाया (2010) – सिलंबारासन के साथ। बहुत प्यारी लव स्टोरी।
- नुव्वोस्तानंते नेनोद्दांताना (2005) – तेलुगु में बड़ी हिट।
- घिल्ली (2004) – विजय के साथ, मसाला एंटरटेनमेंट।
- वरशम (2004) – तेलुगु रोमांटिक ड्रामा, ट्रिशा की करियर को बूस्ट मिला।
- पोन्नियिन सेल्वन पार्ट 1 और 2 – ऐतिहासिक, ट्रिशा का रोल शानदार।
- अभियुम नानुम (2008) – पिता-बेटी की इमोशनल कहानी।
मेरा पर्सनल ओपिनियन: सूर्या और ट्रिशा की जोड़ी मौनम पेसियाधे वाली सबसे ज्यादा पसंद आई। करुप्पू में भी उनकी केमिस्ट्री अच्छी है, लेकिन पुरानी वाली फिल्मों में इमोशन ज्यादा गहरा था।
अगला रिव्यू जल्द आ रहा है। तब तक – सिनेमा खत्म नहीं होता, सिर्फ क्रेडिट्स रोल होते हैं!
जय हिंद, अच्छी सिनेमा देखते रहिए। – सुशांत चौहान
